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संग्रहालय धरोहर,
इस संग्रहालय में तीन प्रभाग हैं- विचार, आकार एवं सत्कार। ‘विचार’ में हस्तलिखित सामग्री है, वहीं ‘आकार’ में साहित्यकारों के उपयोग की वस्तुएँ और आवाज़ों का संग्रह किया गया है, जबकि ‘सत्कार’ में बैठक के साथ ही आगंुतकों को जानकारी उपलब्ध करवाने की व्यवस्था।
 
 
विचार
आकार
छवि संसार
ध्वनि संसार
सरोकार
सत्कार
विद्या विहार
कमलेश्वर पुस्तक केन्द्र
 
 
'विचार' प्रभाग में धरोहर
पाण्डुलिपि एवं रचनाकार रचनाकाल
योग चिन्तामणि विक्रम संवत 1800/ईसवी सन् 1743
श्रीग्रहणावलि विक्रम संवत 1929/ईसवी सन् 1872
महाघटस्थापनाविधि विक्रम संवत 1957/ईसवी सन् 1900
अमरसागर(छायाप्रति)/सन्त अफजल साहब विक्रम संवत 1924/ईसवी सन् 1867
कुंवरबाई को मामेरो(छायाप्रति)/नरसि मेहता विक्रम संवत 1951/ईसवी सन् 1894
संत धनीदास कृत मोतीकथा(छायाप्रति) विक्रम संवत 1936/ईसवी सन् 1879
श्रीमदभागवत् लगभग दो सौ वर्ष प्राचीन
महाभारत लगभग 140 वर्ष प्राचीन
दुष्यन्त कुमार के पत्र(50 पत्र) सन् 1954 से 1975 तक
दुष्यन्त कुमार की डायरी, कविताएँ, नाटक, निबन्ध कहानियाँ, नोट बुक, ‘सांये में धूप’ की मूल पाण्डुलिपि
आदि लगभग 900 पृष्ठों की दुर्लभ सामग्री
सन् 1946 से 1975 तक
प्रमुख साहित्यकारों के पत्र डाॅ. हरिवंश राय बच्चन, क्षेमचन्द्र सुमन, भवानी प्रसाद मिश्र, रामधारी सिंह दिनकर, रामकुमार वर्मा, डाॅ. शिवमंगल सिंह सुमन, जगदीश गुप्त आदि के लगभग 100 पत्र
दो हस्तलिखित पत्रिकाएँ ईसवी सन् 1944 एवं 1946
भगवतीचरण वर्मा की 11 कहानियाँ -अमृतलाल नागर की ‘बाबूजी’
-राही मासूम रज़ा के तीन निबन्ध
-अभिमन्यु अनत(माॅरीशस) की ‘डायरी -के पन्ने’
-माॅरीशस के लेखकों 10 पत्र
-हरिशंकर परसाई के व्यंग्य
-मणि मधुकर की कहानी
-गिरिजा कुमार माथुर की कविताएँ
-रामेश्वर शुक्ल अंचल की कविताएँ
-भैरव प्रसाद गुप्त की कहानी
-प्रभाकर माचवे की कविता
-इलाचन्द्र जोशी की कहानी
-भीष्म साहनी की कहानियाँ और लेख
-प्रणवकुमार बंदोपाध्याय की -कहानी
-द्विजेन्द्रनाथ मिश्र निर्गुण की कहानी
-गोपाल सिंह नेपाली की कविता
 
 
‘आकार’ प्रभाग में धरोहर
1 दुष्यन्त कुमार का कोट, जिसे दुष्यन्त कुमार ने अपने जीवन के अन्तिम कवि सम्मेलन में 20 दिसम्बर 1975 को पहना था। (30 दिसम्बर 1975 को उनका देहान्त हो गया।)
2 दुष्यन्त कुमार की घड़ी, जो अन्तिम समय तक भी उनकी कलाई पर बँधी थी। हवाई यात्रा का टिकट, बैंक पास बुक, हुक्का आदि।
3 ज्ञानपीठ सम्मान से सम्मानित मध्यप्रदेश के एकमात्र साहित्यकार श्री नरेश मेहता की छड़ी।
4 काका हाथरसी का उपयोग किया टाइपराइटर, जो सन् 1906 में खरीदा गया था।
5 शरद जोशी का चश्मा, जो अन्तिम समय तक उनके काम आता रहा।
6 शानी का टाइपराइटर, जिस पर ‘काला जल’ जैसा कालजयी उपन्यास तैयार हुआ।
7 शानी की घड़ी, जो अन्तिम समय तक भी उनकी कलाई पर बँधी थी।
8डाॅ. शिवमंगल सिंह सुमन की कलम, जिससे संग्रहालय के लिए हस्ताक्षर किये।
9दुष्यन्त कुमार को प्राप्त सम्मान पदक एवं प्रशस्ति पत्र, जो उन्हें मध्यप्रदेश शासन साहित्य परिषद ने मरणोपरान्त प्रदान किया।
10शलभ श्रीराम सिंह की कलम, जिसे भेंट करते हुए उन्होंने लिखा- ‘जिस कलम से लिखा इन्कलाबन अलिफ, वो कलम सर न था, सर कलम हो गया’।
11पद्मभूषण से सम्मानित श्री विष्णु प्रभाकर का रजत श्रीफल, जो उन्हें किसी संस्था द्वारा सम्मानस्वरूप भेंट किया गया था।
12 पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, दादा माखनलाल चतुर्वेदी, डाॅ. हरिवंशराय बच्चन, सेठ गोविन्ददास, पं. सोहनलाल द्विवेदी, बालकृष्ण शर्मा नवीन आदि प्रख्यात एवं कालजयी दो दर्जन से अधिक रचनाकारों के ‘हाथ के छापे’ (सन् 1930 से 1960 के बीच) संग्रहालय में मूल रूप से सुरक्षित हैं।
इसके अलावा भी अनेक साहित्यिकारों की अमूल्य धरोहर, जो शोध और सन्दर्भ के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
 
 
 
 
 
 
'सरोकार' प्रभाग में धरोहर
यह संग्रहालय में स्थापित सभाकक्ष है, जिसका निर्माण एन.एच.डी.सी.लिमिटेड भोपाल ने निगमित सामाजिक दायित्व के अन्तर्गत किया है। इसका उद्घाटन 2 जून 2009 को एन.एच.डी.सी.लिमिटेड भोपाल के मुख्य कार्यपालक निदेषक श्री के.एम. सिंह जी ने किया।
 
 
'सत्कार' प्रभाग में धरोहर
इस प्रभाग में कार्यालय है, जहाँ सन्दर्भ और अध्ययन की सुविधा है।
 
 
'विद्याविहार' प्रभाग में धरोहर
यह संग्रहालय द्वारा स्थापित पुस्तकालय है।
 
 
संग्रहालय द्वारा स्थापित ‘कमलेष्वर पुस्तक केन्द्र’ में विक्रय के लिए पुस्तकें उपलब्ध हैं, जहाँ पाठकों को अत्यन्त अल्प मूल्य पर पुसतकें उपलब्ध करवाई जाती है।