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आयोजनों और जलसों में अतिथियों को फूलों और गुलदस्तों से लगभग लाद दिया जाता है. महत्वपूर्ण कवि एवं तत्कालीन संस्कृति सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने संग्रहालय के एक समारोह में यह चिंता जताते हुए नारा दिया 'बुके नहीं, बुक दें'. संग्रहालय ने उसे तत्काल अपनाया और तब से यह परंपरा 'बुके नहीं, बुक दें' निरंतर चल रही है.
 

संग्रहालय अख़बारों में



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दुष्यन्त कुमार मार्ग
संग्रहालय भवन
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय
ई-115/21, शिवाजी नगर
भोपाल- 4620163
दूरभाष -7692026871,83193791260
Email-shabdashilpi@yahoo.com