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दुष्यंत संग्रहालय में हुआ डॉ विमल शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण****** प्रेम की अर्थवत्ता को तलाश करने का उपक्रम करती गज़लें

दुष्यंत संग्रहालय में हुआ डॉ विमल शर्मा की पुस्तक का लोकार्पण
प्रेम की अर्थवत्ता को तलाश करने का उपक्रम करती गज़लें


भोपाल . "बैठा हूँ कब से प्यासा वहीँ इंतजार में, मदिरा लिए थी हाथ में साक़ी किधर गई" - डॉ विमल कुमार शर्मा की ये ग़ज़ल जब प्रसिद्ध गायक और चिकित्सक डॉ के. के. कावरे ने राग मारवाह में प्रस्तुत की, तो दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय का सभागार तालियों से गूँज उठा. मौका था डॉ विमल कुमार शर्मा के सद्यःप्रकाशित ग़ज़ल संग्रह 'तुम, ग़ज़ल और मैं' के लोकार्पण अवसर का. डॉ के. के. कावरे और उनके साथियों ने चार ग़ज़लों की संगीतमय प्रस्तुति दे.  समारोह के मुख्य अतिथि थे वरिष्ठ साहित्यकार श्री विजय वाते, अध्यक्षता की वरिष्ठ गज़लकार श्री ज़हीर कुरैशी ने. विशेष अतिथि के रूप में श्री बी मारिया कुमार, अशोक निर्मल और अनवारे इस्लाम उपस्थित थे.

समारोह के आरम्भ में दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय की और से डॉ विमल कुमर शर्मा और डॉ के. के. कावरे का अभिनन्दन किया गया.

अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री ज़हीर कुरैशी ने कहा कि 'इक्कीसवीं सदी के वर्ष 2018 तक आते आते जब मनुष्य प्रेम का ककहरा भूल रहा है, इन परिस्थतियों में 'तुम, ग़ज़ल और मैं' की गज़लें प्रेम की अर्थवत्ता को तलाश करने का उपक्रम मानी जा सकती हैं". श्री विजय वाते ने कहा की "ये गज़ले जीवन से गायब होते जा रहे प्रेम को खोजने का सार्थक काम करती हैं".

संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने सभी का स्वागत किया. कृतज्ञता ज्ञापन इंद्रा पब्लिकेशन के श्री मनीष गुप्ता ने और सञ्चालन भवेश दिलशाद ने किया.

 

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भोपाल- 4620163
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